Ganesha Utsav : शिव पुराण अनुसार गणेशजी को ये न चढ़ाएँ
Ganesha Utsav शिव पुराण और अन्य ग्रंथों (जैसे गणेश पुराण, पद्म पुराण) में भगवान श्री गणेशजी की पूजा में क्या अर्पित नहीं करना चाहिए, इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में यह त्योहार पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया गया, जो आशा और समृद्धि का प्रतीक है। आज गणेश उत्सव का तीसरा दिन है सबको पता है गणेशजी की पसंदीदा चीजें क्या क्या है पर आपको ये पता है की क्या गणेशजी को चढ़ाना मुश्केली बढ़ा शकते है।

Ganesha Utsav : गणेशजी को क्या नहीं चढ़ाना चाहिए :
- तुलसी पत्ता
- गणेशजी पर तुलसीदल अर्पित करना वर्जित है।
- कथा है कि तुलसीजी ने गणेशजी से विवाह का आग्रह किया था, जिसे उन्होंने अस्वीकार किया, इसलिए तुलसी उन्हें स्वीकार्य नहीं।
- इस कारण तुलसीजी ने उन्हें श्राप दिया और गणेशजी ने भी तुलसी को श्राप दिया कि उनके पूजन में तुलसी का प्रयोग वर्जित रहेगा।
- दूध से बनी दही Ganesha Utsav
- दही या छाछ सीधे गणेशजी पर नहीं चढ़ाते।
- दही शीतल व भारी होता है, जबकि गणेशजी को हल्का, सुपाच्य और सात्विक प्रसाद (जैसे मोदक, लड्डू) प्रिय है।
- शिव पुराण में दही चढ़ाना वर्जित कहा गया है।
- शनि से और केतु ग्रह से संबंधित जुड़ी वस्तु
- जैसे तिल का तेल और उड़द दाल गणेशजी को अर्पित नहीं की जातीं।
- तिल और तिल का तेल शनि और केतु ग्रह से जुड़ा माना जाता है।
- गणेशजी विघ्नहर्ता हैं और शनि-केतु के कष्ट से मुक्ति दिलाते हैं, इसलिए यह अर्पण नहीं किया जाता।
- उड़द भी शनि ग्रह से जुड़ी है और तामसिक मानी जाती है।
- गणेशजी को सात्विक वस्तुएँ अधिक प्रिय हैं।
- शंख से जल अर्पण
- शंख से जल चढ़ाना गणेशजी को निषिद्ध है।
- शंख समुद्र से उत्पन्न होता है और गणेशजी को गंगा जल, स्वच्छ जल प्रिय है।
- शंख से जल चढ़ाना अशुभ माना गया है क्योंकि शंख विष्णु जी का प्रतीक है।
- अर्क/मदार के फूल
- गणेशजी को मदार, दूब के अलावा विषैले पौधे चढ़ाना वर्जित है।
- खासकर कुमुदनी, चमेली, मालती के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए।
- ये फूल अशुभ और तामसिक प्रभाव वाले माने जाते हैं।
- गणेशजी को लाल, ताजे और सात्विक फूल जैसे गेंदा, जपा, कमल अधिक प्रिय हैं।
- तुलसी से बनी माला या तुलसी की मंजीरी
- इसका विशेष निषेध है।
गणेशजी को तुलसी, शंख का जल, दही, तिल का तेल, उड़द, मदार/कुमुदनी/चमेली के फूल अर्पित नहीं करने चाहिए।गणेशजी को सात्विक, पवित्र और शुभ वस्तुएँ प्रिय हैं। तुलसी, दही, तिल का तेल, उड़द और कुछ फूल श्राप, तामसिकता या अन्य देवताओं से जुड़ाव के कारण गणेशजी को अर्पित नहीं किए जाते।
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