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Bjp: हार-जीत के छोटे अंतर को लेकर समीक्षा, संगठन में बदलाव

Uttar Pradesh

Bjp: भारतीय जनता पार्टी की हाईकमान इस तरह की गुटबाजी से बहुत नाराज है। ऐसे में, जिला चुनाव में हुए नुकसान और जीत के छोटे से अंतर को लेकर बहस जारी है।
भाजपा ने उत्तर प्रदेश में मेरठ लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक नुकसान उठाने के बाद पुनर्विचार में जुट गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हर जिले में बैठकों में गुटबाजी देखने को मिलती है। भाजपा ने ऐसा पहली बार देखा है। शायद यही कारण है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी को इतना नुकसान हुआ है।

इस तरह की गुटबाजी से हाईकमान बहुत नाराज है। ऐसे में, मंडल स्तर तक के कार्यकर्ताओं से प्रत्येक लोकसभा वार की समीक्षा की जाती है।

Bjp: इसमें पार्टी में भितरघात और बुरे व्यवहार वाले अधिकारियों की रिपोर्ट भी जुटाई जाएगी, जो हाईकमान को पेश की जाएगी। पार्टी संगठन में व्यापक बदलाव करने के लिए उत्सुक है। जनता से दूरी बनाने वाले अफसरों पर भी कार्रवाई होने की उम्मीद है।
भाजपा और रालोद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चौबीस लोकसभा सीटों में से सात पर जीत हासिल की हैं। भाजपा ने इस बार दो जीतने वाली सीटों पर चुनाव हार गया। प्रदीप चौधरी को कैराना में हार हुई। मुजफ्फरनगर के पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान चुनाव हार गए।

भाजपा ने मेरठ में रामायण धारावाहिक में श्रीराम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को प्रत्याशी बनाया, लेकिन इससे उम्मीद की गई माइलेज नहीं मिली। जीत का अंतर बहुत छोटा था। मुजफ्फरनगर में संजीव बालियान और सरधना के पूर्व विधायक संगीत सोम के बीच हुई बहस के बारे में सभी नेता जानते हैं।

बागपत लोकसभा में मंगलवार को समीक्षा बैठक में फरीदपुर के विधायक श्याम बिहारी, लोकसभा संयोजक जितेंद्र सतवई और लोकसभा प्रभारी के बीच ही विवाद हुआ।

पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष सुदेश चौहान ने कहा कि सपा प्रत्याशी को तीन लाख से अधिक वोट कैसे मिले? भाजपा के एक महत्वपूर्ण नेता का अपमान भी बताया गया। गोरखपुर क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय और सहारनपुर विधायक राजीव गुंबर ने मेरठ में समीक्षा की।
सभी 16 मंडलों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महामंत्री ने समीक्षा में अलग-अलग बातें कीं। पदाधिकारियों ने दावा किया कि चुनाव में उनका कोई सम्मान नहीं किया गया था। उनके फोन का जवाब नहीं मिला। बड़े अधिकारियों ने उपेक्षा की। बाद में जनप्रतिनिधियों से चर्चा की गई। चुनाव में जीत के छोटे से अंतर पर सहमत नहीं होने के आरोप लगे।

Bjp: साथ ही जनप्रतिनिधियों से दूर रहने वाले अधिकारियों की रिपोर्ट

कई जनप्रतिनिधियों ने कई अधिकारियों का नाम लेकर कहा कि अगर ऐसे दुर्व्यवहार करने वाले अधिकारी होंगे तो जनता नाराज नहीं होगी। गोरखपुर क्षेत्र के पूर्व अध्यक्ष एमएलसी धर्मेंद्र सिंह ने मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान की हार पर चर्चा की। भाजपा में विभाजन हुआ। आधे पदाधिकारियों ने इसमें भाग नहीं लिया।

सभी कारणों की रिपोर्ट बनाई जा रही है जो चुनाव में जीत और हार का अंतर बताते हैं। विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने प्रत्याशी चयन पर भी प्रश्न उठाया। गाजियाबाद में कार्यकर्ताओं में प्रत्याशी को लेकर सबसे अधिक मतभेद दिख रहे हैं।
कैराना भी इसी तरह है। चुनाव में अपने नेताओं की गुटबाजी के अलावा, जनप्रतिनिधियों के बुरे व्यवहार वाले अधिकारियों के बारे में सबसे अधिक शिकायत की गई है। यह बताया गया है कि अगर वे नहीं सुनते तो लोगों का काम कैसे करेंगे? लोगों की नाराज़गी तब बढ़ेगी जब काम नहीं होगा। जनता परेशान है क्योंकि कई विभागों में व्यापक भ्रष्टाचार हो रहा है।

Bjp: संघ की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी

संघ के पदाधिकारियों की रिपोर्ट भी सभी लोकसभा सीट पर बहुत अहम मानी जाती है। भी कार्यकर्ताओं के साथ संघ की रिपोर्ट जल्द ही हाईकमान को दी जाएगी। इसके बाद पार्टी महत्वपूर्ण बदलाव कर सकती है।

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