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Damoh: नर्मदा बेसिन परियोजना ने तेंदूखेड़ा में मां नर्मदा जल को पहुंचाया, जो भयानक जल संकट से निपटने के लिए एक वरदान साबित हुआ

Madhya Pradesh

Damoh: नर्मदा बेसिन योजना के प्रभारी अभिषेक पांडे ने बताया कि तेंदूखेड़ा नगर में 3400 कनेक्शन हो चुके हैं और सभी में घर-घर पानी मिल रहा है। जंगली क्षेत्र में लाइन बहुत लीकेज थी। वहां होदी का निर्माण हुआ है।
हर साल दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लाक में भीषण जल संकट होता है, लेकिन इस साल शुरू हुई नर्मदा बेसिन परियोजना क्षेत्र के लिए वरदान साबित हुई है। हालाँकि, नगर परिषद के टैंकरों से पानी नहीं देना पड़ा। क्योंकि ९० प्रतिशत घरों में पानी है। दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जहां-जहां लाइन में लीकेज था, वहां टंकियां बनाई गईं, जिनमें पानी भरा हुआ था, जिससे मवेशी भी प्यास बुझा सकते थे।

Damoh: मार्च में शुरू हुआ

Damoh: यह योजना मार्च में शुरू हुई थी और इस साल अन्य वर्षों की तुलना में अधिक गर्मी हुई। इसके बाद भी नगर में पानी की कमी नहीं हुई। प्रत्येक घर में पर्याप्त पानी है। यही कारण है कि इस वर्ष नगर परिषद की टैंकर सुविधा शुरू नहीं हुई।

Damoh: आखिरकार, तेंदूखेड़ा नर्मदा जल पर पहुंचा।

नर्मदा नदी का पहला ब्लाक दमोह जिले का तेंदूखेड़ा है। नर्मदा नदी जीवनदायिनी कहलाती है। है तेंदूखेड़ा में भी इसी तरह की योजनाओं का पालन किया गया है, क्योंकि शहर के साथ-साथ जंगली इलाकों में भी इसका लाभ मिला है। निर्माण कंपनी ने तेंदूखेड़ा में नर्मदा का पानी जंगलों, पहाड़ों और चट्टानों से लाया है। इन्होने बीच-बीच में ऐसा प्रयास किया। इससे राहगीरों और बेजुबान जानवरों को भी फायदा हुआ है।

यह लाइन जंगली क्षेत्र से आती है और पाटन की टेक से नरगंवा गांव तक 15 किमी है। इससे पहले इस क्षेत्र में कभी पानी नहीं था। पानी की कमी के कारण गर्मियों में यहां रहने वाले जानवर दूसरे स्थानों की ओर भाग जाते थे, लेकिन इस वर्ष यह जानवर यहीं है। ठेकेदार ने जंगली क्षेत्र में दो से तीन जगह छोटे से लीकेज होने पर उसके नीचे होदी बना दी है, जिसमें पर्याप्त पानी होता है, जिससे जानवरों और राहगीरों को भीषण गर्मी में राहत मिली है।

Damoh: दिख रहे कई तरह के जानवर

पाटन से नरगवा तक जगह-जगह पानी भरने से मवेशियों को भी इसका पूरा लाभ मिला है। इसलिए इस वर्ष क्षेत्र में कई जानवरों ने दिखाई दिए, पानी के कारण यहां तक कि एक तेंदुआ ने भी अपना घर बनाया था। इसके अलावा, हर दिन सुबह शाम नीलगाय, सियार और अन्य मवेशी पानी पीते दिखाई देते हैं। यह योजना जानवरों (मवेशियों सहित) के लिए भी फायदेमंद सिद्ध हुई है। इस वर्ष जंगल में चलने वाले लोगों और चरवाहो को पर्याप्त पानी मिला है।

नर्मदा जल आने के बाद इस वर्ष नगर में जल संकट नहीं हुआ है, कहते हैं नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि सतेन्द्र जैन। इसलिए टेंकर प्रणाली को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। नर्मदा बेसिन योजना के प्रभारी अभिषेक पांडे ने बताया कि तेंदूखेड़ा नगर में 3400 कनेक्शन हो चुके हैं और सभी में घर-घर पानी पहुंच रहा है। जंगली क्षेत्र में लाइन बहुत लीकेज थी। वन विभाग ने वहां होदी बनाई थी। इसलिए वहां रहने वाले जानवरों, मवेशियों और राहगीरों को आसानी से साफ सुथरा पानी मिलता है और 24 घंटे भर पर्याप्त पानी मिलता है।

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