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UP: जानिए पूरी कहानी, क्योंकि राहुल गांधी के हाथों से चर्चाओं में आई पॉकेट संविधान का सीधा संबंध लखनऊ से है।

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UP: आपने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान, प्रेस वार्ताओं और फिर संसद में राहुल गांधी के हाथ में संविधान का एक खंड देखा होगा। इस लेख का लखनऊ से सीधा संबंध है।

हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में संविधान शब्द ने सबसे अधिक मतभेद पैदा किए हैं। राहुल गांधी सहित पूरे विपक्ष ने चुनावी मुद्दा बनाया कि मोदी सरकार संविधान बदल सकती है अगर चार सौ सीटें जीतती है। आप नतीजे देख सकते हैं। राहुल गांधी को लगातार इस संविधान को बदलने की बात कहते हुए एक पुस्तक हाथ में थी। फिर, चाहे वह रैली में हो, प्रेस वार्ता में हो या संसद में शपथ लेते समय हो। उनके हाथ में पॉकेट संविधान था। इस पॉकेट में संविधान पुस्तक से लखनऊ से सीधा संपर्क है।

लखनऊ में ईस्टर्न बुक कंपनी (ईबीसी) द्वारा प्रकाशित चमड़े के कवर वाली इस लाल किताब ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान काफी चर्चा बटोरी, जब विपक्ष के नेताओं, खासकर राहुल गांधी, ने रैलियों में बार-बार कहा कि वह संविधान में बदलाव करेंगे अगर भाजपा सत्ता में लौटेगी।

लालबाग स्थित Eastern Book Company के सेल्स अधिकारी सुधीर कुमार ने बताया कि संविधान के इस पॉकेट संस्करण का अकेला प्रकाशक ईबीसी है। पिछले तीन महीने में इसकी लगभग 5000 प्रतियां बिकी हैं। 2009 में इसका पहला संस्करण प्रकाशित हुआ था और तब से 16 संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं। पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने इसका प्रस्ताव बनाया है।

UP: ईस्टर्न बुक ने कराया है आईपीआर

ईस्टर्न बुक कंपनी ने इस पॉकेट संविधान संस्करण का बौद्धिक संपदा अधिकार सुरक्षित रखा है। इसका अर्थ है कि किताब का साइज, स्टाइल, कलर और फांट नकल नहीं हो सकता। सुधीर बताते हैं कि भारतीय सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अक्सर अपने कोट की जेब में संविधान का यह संस्करण रखते हैं। इसे विश्व भर में कई पुस्तकालयों में भी रखा गया है। ‘बाइबिल पेपर’ पर छपा संविधान का पॉकेट संस्करण 624 पन्नों का है। इस संविधान की चौड़ाई 9 सेमी है और लंबाई 20 सेमी है।

UP: ‘बाइबिल पेपर’ क्या है?

सुधीर कहते हैं कि 624 पन्नों की किताब को अंतरराष्ट्रीय मानकों और गुणवत्ता से समझौता किए बगैर पॉकेट में फिट होने लायक छापना मुश्किल था। इसके लिए, अध्ययन के बाद कंपनी ने इसे बाइबिल पेपर पर छापा। बहुत सख्त पन्नों के बावजूद यह मजबूत है। साथ ही, दोतरफा प्रिंट में छपे हुए शब्दों को दूसरी तरफ से नहीं दिखाई देता। इसी पेपर पर आठ लाख से ज्यादा शब्दों वाली बाइबिल जैसी मोटी किताब भी छापी जाती है, जो सभी के लिए उपलब्ध होती है।

UP: जानिए पूरी कहानी, क्योंकि राहुल गांधी के हाथों से चर्चाओं में आई पॉकेट संविधान का सीधा संबंध लखनऊ से है

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